परीक्षा का डर – बच्चों और माता – पिता में तनाव

परीक्षा का डर से परेशान विद्यार्थी

परीक्षा के समय परिवार में बढ़ता तनाव

जब परीक्षा का समय आता है या आने वाला होता है, तो जिन परिवारों मे पढ़ने – लिखने वाले, स्कूल – कॉलेज जाने वाले या प्रतियोगी परीक्षा ( कॉम्पटीटिव एग्जाम ) वाले बच्चे है, उन घरों मे एक अतिरिक्त तनाव प्रवेश कर जाता है, जो घर के किसी सदस्य को समझ नही आता |

परीक्षा बच्चों की होती है, मगर एक अदृश्य परीक्षा माता – पिता की भी होती है |

बच्चे तो परीक्षा की वजह से तनाव मे रहते ही है उस पर माता – पिता खुद भी बच्चों की परीक्षा के तनाव मे आ जाते है और बच्चों को अच्छे नम्बर से पास होने का दबाव  डालते है |

कुछ माता – पिता तो अपने बच्चों के लिए एक आंकड़ा सेट करके रख देते है कि कम से कम इतने नम्बर तो आने ही चाहिए |

कई माता – पिता को पता भी नही चलता है कि वो खुद कितने तनाव मे है और अपने बच्चों को कितना तनाव दे रहे है |

इन्ही सब कारणों से परीक्षा का माहौल बहुत ही तनावपूर्ण हो जाता है, जिसका सबसे ज्यादा दबाव बच्चे महसूस करते है |

छोटे बच्चों की तुलना मे बड़े बच्चे और उनके माता – पिता ज्यादा तनाव मे होते है और जैसे – जैसे बच्चे बड़ी कक्षा ( क्लास ) मे जाते है, साल दर साल ये तनाव बढ़ता ही रहता है |

बोर्ड परीक्षा मे डर और तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है | ये डर प्रतियोगी परीक्षा ( कॉम्पटीटिव एग्जाम ) तक बना रहता है | इस डर, तनाव और परीक्षा मे असफल होने की वजह से हर साल हजारों छात्र आत्महत्या कर लेते है |

भारत में परीक्षा तनाव की स्थिति: सर्वे और तथ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बच्चों और किशोरों में मानसिक तनाव एक गंभीर विषय है।

अपने देश मे कई सर्वे और कई अध्ययन हो चुके है जिसके अनुसार, लगभग 82 प्रतिशत छात्रों को परीक्षा की चिन्ता रहती है जिसकी वजह से वो दबाव महसूस करते है और 66 प्रतिशत माता – पिता को भी अपने बच्चों की परीक्षा की काफी हद तक चिन्ता रहती है,

जिसकी वजह से ये माता – पिता भी तनाव मे आ जाते है और खुद पर भी बच्चों की परीक्षा का दबाव महसूस करते है जिसके कारण अपने बच्चों को भी अतिरिक्त तनाव देते है |

छात्रों मे तनाव के लक्षण –

बहुत ज्यादा चिन्ता करना, चिड़चिड़ापन, किसी काम मे मन ना लगना, दिल घबराना, हथेलियों और तलवो मे पसीना आना, मुँह बार – बार सूखना, चक्कर आना, पेट दर्द, उल्टी, आत्मविश्वास मे कमी, ज्यादा गुस्सा करना, बात – बात पर रोना, परीक्षा के दौरान बेहोश होना, ये सब लक्षण परीक्षा के डर और तनाव के है |

कहाँ से और क्यों आता है ये तनाव ?

बच्चों और उनके माता – पिता मे परीक्षा का डर और तनाव आने के कई कारण है —

 भविष्य का डर –

समाज मे ये डर है कि अगर परीक्षा मे असफल हो गए या कम नम्बर आये तो भविष्य सुरक्षित नही है | आबादी बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से कॉम्पीटिशन बहुत ज्यादा है |

भविष्य की चिन्ता

छात्रों और उनके माता – पिता को यही सबसे बड़ी चिन्ता होती है कि अगर कम नम्बर आएंगे तो अच्छे स्कूल, कॉलेज मे एडमिशन नही मिलेगा | अच्छे कोर्स के लिए आवेदन नही कर पाएंगे |

अच्छी नौकरी नही मिल पायेगी |अगर किसी बच्चे के कम नम्बर आ गए या वो फेल हो गया है तो ऐसा समझा जाता है कि जैसे सब कुछ खत्म हो गया |

असफल शिक्षा प्रणाली ( फेल एजुकेशन सिस्टम ) –

अपने देश की शिक्षा प्रणाली ( एजुकेशन सिस्टम ) मे बहुत कमिया है | इसमें ज्ञान और योग्यता की जगह छात्रों के नम्बर को ही सब कुछ माना जाता है |

इसमें नौकरियो पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है | तकनीकी शिक्षा ( टेक्निकल पढ़ाई ), खेल, कला, संगीत, स्वरोजगार ( खुद का काम ), स्वव्यवसाय ( खुद का बिज़नेस ) जैसे क्षेत्रो पर अपने देश की शिक्षा प्रणाली मे ध्यान नही दिया जाता |

अपने देश की शिक्षा प्रणाली से ज्यादातर छात्र नौकरी करने वाले बनते है, नौकरी देने वाले बहुत कम लोग ही बन पाते है |

अच्छी नौकरी पाने को ही सफलता मानना –

पुराने ज़माने मे भारत बहुत ही खुशहाल और सम्पन्न था, इसलिए भारत को सोने की चिड़िया बोला जाता था | इसका सबसे बड़ा कारण घर – घर मे होने वाले लघु और छोटे उद्योग थे |

उस समय हर व्यक्ति अपना स्वरोज़गार ( खुद का काम ) करना पसन्द करता था | उस समय नौकरी करना अच्छा नही माना जाता था |

जबकि आज के समाज मे लोगो को लगता है कि अच्छी नौकरी पाने से ही जीवन मे सफलता आती है | अब नौकरी को ही सब कुछ माना जाता है |

जनसंख्या बहुत ज्यादा है और अच्छी नौकरियाँ बहुत कम है, जिसकी वजह से एक – एक सीट के लिए बहुत ज्यादा कॉम्पीटिशन है |

इन्ही कारणों से अच्छी नौकरी को पाने के लिए छात्र और उनके परिवार तनाव मे रहते है |

अत्यधिक उम्मीदें –

माता – पिता अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखते है , अपने बच्चों की तुलना दूसरे पढ़ाई मे तेज़ बच्चों से करते है |

सभी बच्चों की बौद्धिक क्षमता ( समझदारी ) अलग – अलग होती है | दुनिया के सभी बच्चे पढ़ाई मे तेज़ नही हो सकते, ये नामुमकिन है |

हर बच्चा टॉपर नही बन सकता है | हर बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या अफसर नही बन सकता |

मगर दुनिया के सभी माता – पिता अपने बच्चों को सबसे बेस्ट बनता देखना चाहते है |

बच्चों की सफलता या असफलता को परिवार की प्रतिष्ठा और सम्मान से जोड़ना –

भारतीय समाज मे ऐसे बहुत से लोग होते है जो बच्चों की असफलता को उनके परिवार की असफलता से जोड़ देते है |

जैसे किसी बच्चे के नम्बर कम आये या वो फेल हो गया तो बहुत से लोग इसका सबसे बड़ा कारण माता – पिता को मानते है कि उन्होंने अपने बच्चे पर ध्यान क्यों नही दिया |

माता – पिता भी अपने बच्चों के परीक्षा के परिणाम ( रिज़ल्ट ) को अपनी प्रतिष्ठा मान लेते है | ताकि समाज मे, खानदान मे, पड़ोसियों मे, रिश्तेदारी मे उनको शर्मिंदगी ना महसूस हो |

कुछ माता – पिता अपने खुद के सपने पूरा करना चाहते है –

माता – पिता अक्सर अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं, लेकिन कभी – कभी उनकी अपनी उम्मीदें और अपने सपनों को बच्चों पर थोप देते हैं।

बच्चे की पसंद कोई दूसरा क्षेत्र है, मगर माता – पिता बच्चे को अपनी  पसंद के क्षेत्र मे ले जाना चाहते है और अपने बच्चों की पढ़ाई भी उसी क्षेत्र मे करवाते है |

जैसे मान लीजिये किसी बच्चे मे एक अच्छा खिलाड़ी या अच्छा सिंगर या कुछ और बनने की सारी योग्यता है, और उसमे बच्चे का मन भी बहुत लगता है,

मगर माता – पिता उसको सरकारी नौकरी या किसी बड़ी इंटरनेशनल कम्पनी मे नौकरी के लायक बनाना चाहते है |

इसलिए माता – पिता ना तो अपने बच्चे का स्टेडियम मे एडमिशन करवाएंगे और ना किसी सिंगिंग क्लास मे एडमिशन करवाएंगे |

इसकी वजह से बच्चा हर जगह पिछड़ जायेगा | ना तो वो अपने मन का कुछ बन पायेगा और ना ही अपने माता – पिता के मन का कुछ बन पायेगा |

ना वो अपने सपने पूरे कर पायेगा और ना ही अपने माता – पिता के सपने पूरे कर पायेगा |

माता – पिता के त्याग –

बच्चों की पढ़ाई के लिए माता – पिता बहुत कुछ बलिदान करते है | बच्चों की पढ़ाई मे कोई कमी ना रह जाये,

इसके लिए माता – पिता बैंको से लोन लेते है, कई जगह कर्ज़ा लेते है | कोचिंग और ट्यूशन का खर्चा उठाते है |

अच्छे स्कूल, अच्छे कॉलेज, अच्छी कोचिंग मे बच्चों को पढ़ाने का खर्चा उठाते है | कुछ माता – पिता बड़े शहरो मे अपने बच्चों को पढ़ने भेजनें का खर्चा उठाते है |

हालांकि इन सब बातो का लक्ष्य बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए होता है, मगर माता – पिता के त्याग को देखकर बहुत से बच्चे तनाव मे आ जाते है कि अगर मेरे कम नम्बर आये या मैं फेल हो गया तो मेरे माता – पिता ने जो इतनी कठिनाई झेली है, इतने त्याग किये है सब बेकार चले जायेंगे |

आपसी बातचीत की कमी –

कई बार माता – पिता अपने बच्चों के तनाव को समझ नही पाते, जिससे बच्चे अकेलापन महसूस करने लगते है | कम नम्बर लाना या फेल होना परिवार के लोग अपराध मान लेते है, और बच्चा खुद को दोषी मान लेता है |

आपसी बातचीत में कमी

जिसकी वजह से हर साल हजारों छात्र आत्महत्या तक कर लेते है |

ये बात तो सब कहते है कि माता – पिता अपने बच्चो की खुशियों के लिए बहुत त्याग करते है मगर एक और बात भी सच है कि हर बच्चा भी ये चाहता है कि उसके माता – पिता और उसका परिवार हमेशा ख़ुश और सुखी रहे |

जब बच्चे अपनी खुद की उम्मीदों और अपने माता – पिता की उम्मीदों पर खरे नही उतर पाते है तो बहुत ज्यादा तनाव मे आ जाते है | कुछ बच्चे तो अपने आप से ही नफ़रत करने लगते है और दुखी होकर आत्महत्या जैसे कदम उठाते है |

कुछ माता – पिता का खराब रवैया –

कुछ घरो मे बच्चों पर बहुत ज्यादा सख़्ती की जाती है | छोटी – छोटी बातो पर बच्चों की पिटाई की जाती है | बड़े बच्चों को ताने मारे जाते है |

माता – पिता के आपस मे झगड़े होते है | अगर बच्चा पढ़ाई मे कमजोर है तो माता – पिता एक दूसरे को जिम्मेदार मानते है | ऐसे घरो के बच्चे बहुत ज्यादा तनाव मे रहते है |

 मज़ाक बनने का डर –

अधिकतर छात्रों मे ये डर होता है कि अगर रिज़ल्ट अच्छा नही आया तो परिवार मे मुझे ठीक से प्यार नही मिलेगा | दोस्त मज़ाक उड़ाएंगे | पडोसी और रिश्तेदार ताने मारेंगे | स्कूल, कॉलेज और कोचिंग मे शर्म लगेगी |

मिलेनियम माता – पिता

मिलेनियम माता – पिता खुद पढ़े – लिखें होते है | काफ़ी समझदार होते है और समाज मे सफल होते है |

ये अपने बच्चों को उनका करियर चुनने की पूरी आज़ादी देते है, उनकी हर सम्भव मदद करते है |मगर इनमे सबसे ज्यादा कमी होती है समाज मे अपने सम्मान की |

सबसे ज्यादा यही लोग अपने बच्चों की दूसरे बच्चों से तुलना करते है | इनको अपने बच्चों को किसी भी तरह से बेस्ट बनाना है |

इनकी अपने बच्चों से उम्मीदें टॉपर की ही होती है, क्योंकि समाज मे इनको अपना स्टेटस, अपना प्रभाव बरकरार रखना है |

परीक्षा का तनाव और डर रोकने के कुछ उपाय –

परिवार द्वारा बच्चो की मदद –

 बच्चों का तनाव दूर करने मे माता – पिता और घर के बड़ो को मदद करनी चाहिए, ना कि खुद तनाव लेकर अपने बच्चों को और ज्यादा तनाव मे डालना चाहिए | शैक्षणिक विशेषज्ञों और शोध के अनुसार,

अपनी सोच को पॉजिटिव रखना चाहिए |परीक्षा मे परिणाम कुछ भी हो, बच्चों के प्रयास की सराहना हमेशा करनी चाहिए |

टाइम मैनेजमेंट –

छात्रों और परिवार द्वारा सही योजना बनाना चाहिए |पढ़ाई के साथ – साथ खेल और आराम के लिए भी टाइम टेबल होना चाहिए | समय से पढ़ना, खेलना और आराम करना चाहिए |

खेलना और आराम करना भी बहुत ज़रूरी होता है| पढ़ाई के समय बीच – बीच मे थोड़ा ब्रेक भी होना चाहिए | पढ़ाई के लिए बड़े लक्ष्य की जगह छोटे – छोटे लक्ष्य बनाये |

छात्र सोशल मीडिया जैसे – इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक आदि से अपने कीमती समय को बचाये और रील या वीडियो देखकर अपना समय बर्बाद ना करे, ऑनलाइन गेम ना खेले या इससे थोड़ी दूरी बनाये रहे |

समय से पढ़ाई करे, समय से खाना खाये, समय से खेले और समय से सो जाये |

घर का माहौल शान्त रखे –

जिस घर मे बहुत झगडे होते है, परिवार के लोगो मे आपसी कलह – मनमुटाव होता है, उस घर का माहौल पढ़ाई के लायक नही रहता |

घर मे शोर – शराबा नही होना चाहिए | पड़ोसियों से, रिश्तेदारों से झगड़े नहीं होने चाहिए, ताकि घर का माहौल शान्त रहे और छात्रों को पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल मिल सके |

अच्छे टीचर से सहायता –

छात्र और उनके माता – पिता अच्छे टीचर से सहायता ले सकते है | बच्चे ट्यूशन या कोचिंग पढ़ सकते है |

बच्चे पढ़ाई मे आ रही परेशानी और अपनी कमजोरियो के बारे मे टीचर को बताये | टीचर से उन सब्जेक्ट के बारे मे ज़रूर बात करे जिसमे ज्यादा कमजोर है |

माता – पिता और घर के बड़े लोग समय – समय पर अपने बच्चों के बारे मे टीचर से जानकारी लेते रहे |

सही खाना, खेल और व्यायाम –

छात्रों को खाना सही समय पर खाना चाहिए | रात का खाना हल्का होना चाहिए और रात 8 से 9 बजे तक खाना खा लेना चाहिए और 8 से 10 गिलास पानी रोज़ पीना चाहिए |

चिप्स, कोल्ड्रिंक्स जैसे जंकफ़ूड और पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स जैसे फ़ास्टफ़ूड से बचना चाहिए |

अच्छे और संतुलित भोजन से शरीर मे पोषण मिलता है जो छात्रों के लिए बहुत ज़रूरी होता है |

पढ़ाई के साथ – साथ खेल और व्यायाम भी ज़रूरी होता है | खेल और व्यायाम से हैप्पी हार्मोन्स एक्टिव होते है जो कि मूड को अच्छा रखने के लिए बहुत ज़रूरी होते है |

हेल्पलाइन की मदद –

डर और तनाव को दूर करने के लिए टेली मानस और आईकॉल जैसी हेल्पलाइन का आप सहारा ले सकते है, जिसमे हर समय छात्रों और उनके माता – पिता के लिए सलाह उपलब्ध रहती है |

जो कि पूरी तरह से फ्री है |

इन हेल्पलाइन के नम्बर

14416

18008914416

9152987821

ध्यान योग और काउंसलिंग –

ध्यान, योग और काउंसलिंग – अगर तनाव और डर ज्यादा है तो छात्र और उनके माता – पिता ध्यान ( मैडिटेशन ), योग और किसी अच्छे टीचर या काउंसलर का सहारा भी ले सकते है |

कम नम्बर लाना या फेल होने का मतलब सब कुछ खत्म होना नही होता –

छात्रों और उनके परिवार को ये समझना चाहिए कि परीक्षा मे कम नम्बर लाने से या असफल हो जाने से सब कुछ खत्म नही हो जाता |

उतार – चढ़ाव तो पूरी ज़िन्दगी मे आते – जाते रहते है | दुनिया मे बहुत लोग हुए है जो पढ़ाई मे कमजोर थे, मगर समय आने पर उन्होंने अपने क्षेत्र मे बहुत बड़ी और महान सफलता हासिल की है, जिनमे से कुछ उदाहरण है –

    • अल्बर्ट आइंस्टटीन – महान वैज्ञानिक, जिनके टीचर्स को लगता था कि ये बेवकूफ है, ये कुछ नहीं कर पाएगा,
    • थॉमस एडिसन – महान आविष्कारक, जिन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था,
    • सचिन तेंदुलकर – क्रिकेट के भगवान, जो 10वीं में फेल हुए थे,
    • स्टीव जॉब्स – एप्पल के को-फाउंडर जिन्होंने कॉलेज छोड़ दिया था,

    • बिल गेट्स – माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर जिन्होंने कॉलेज छोड़ दिया था,

    • मार्क जुकरबर्ग – फेसबुक के फाउंडर, जिन्होंने कॉलेज छोड़ दिया था,

    • डिएगो माराडोना – महान फुटबॉलर, जो पढ़ाई में कमजोर थे, और फेल हुए थे,

    • एबी डिविलियर्स, हरभजन सिंह, हार्दिक पांड्या – क्रिकेटर – जो पढ़ाई में बहुत कमजोर थे और फेल हुए थे |

इन लोगों ने अपनी कमजोरियों को अपनी ताकत बनाया और अपने क्षेत्र में सफलता हासिल की |

दूसरे क्षेत्रो ( फील्ड ) को बेकार मत समझे –

अगर बच्चों का मन किसी और क्षेत्र, किसी और चीज मे बहुत ज्यादा लगता है तो परिवार को उस पर भी ध्यान देना चाहिए और बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए |

अच्छी नौकरी के अलावा भी बहुत से क्षेत्र है जिसमे लोग नाम और पैसा दोनों कमा रहे है |

स्वरोजगार ( खुद का काम ), स्वव्यवसाय ( खुद का बिज़नेस ), ऑनलाइन बिज़नेस, डिजिटल मार्केटिंग, खेल जगत, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, फिटनेस इंडस्ट्री, फिजिकल एजुकेशन, योग, राजनीति, कला जगत, फ़िल्म इंडस्ट्री, एक्टिंग, सिंगिंग, डांसिंग, म्यूजिक, राइटिंग, ब्यूटी, हेयर ड्रेसर, मेकअप आर्टिस्ट, फैशन, हस्तकला, मूर्तिकला, पेंटिंग, फोटोग्राफी, सोशल वर्क, ग्राफ़िक डिजाइनिंग, लाइव स्ट्रीमिंग जैसे हजारों क्षेत्र है जहाँ पर करोड़ो लोग सफल है