सर्दियों ( जाड़े ) में जोड़ो का दर्द | कारण और उपाय :-

सर्दियों ( जाड़े ) मे जोड़ो ( ज्वाइंट ) का दर्द —

सर्दियों मे घुटनो और जोड़ो का दर्द

दुनियाभर मे हुई शोधो के अनुसार जाड़े मे लगभग 30 प्रतिशत लोगो मे जोड़ो का दर्द बढ़ जाता है |

रक्त प्रवाह ( धमनियो मे खून का बहना ) कम होना –

ठण्ड मे शरीर मे रक्त का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे हाथ, पैर और जोड़ो तक खून कम पहुँचता है | नसे संकुचित हो जाती है, जिसकी वजह से जोड़ो तक ऑक्सीजन और पोषण की मात्रा कम हो जाती है, जिसके कारण जोड़ो मे दर्द और अकड़न बढ़ जाती है |

जोड़ो की चिकनाई कम होना –

ठण्ड मे जोड़ो मे मौजूद लुब्रिकेशन द्रव सिनोवियल फ़्लूइड गाढ़ा हो जाता है, जिससे जोड़ो की चिकनाई कम हो जाती है | ऐसे मे शारीरिक गतिविधि के समय जोड़ आपस मे टकराने लगते है, जिसकी वजह से उनमे दर्द होता है |

वायुदाब ( ब्लड प्रेशर ),, मे कमी-

सर्दियों मे ब्लड प्रेशर मे कमी आ जाती है, जिससे शरीर के ऊतको ( टिश्यू ) मे हल्की सूजन आ जाती है , जो जोड़ो के आस – पास दबाव बढ़ाती है, जिससे दर्द महसूस होता है |

शारीरिक सक्रियता ( फ़िजिकल एक्टिविटी ) मे कमी-

ठण्ड मे शारीरिक सक्रियता मे कमी होने पर शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा पड़ जाता है | जोड़ो तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के पहुँचने मे कमी आ जाती है, जिससे माँसपेशियों और जोड़ो मे दर्द होता है |

विटामिन डी की कमी –

धूप कम मिलने से शरीर मे विटामिन डी की कमी हो जाती है, जिससे हड्डियाँ और जोड़ कमजोर हो जाते है और दर्द बढ़ जाता है |

ठण्डी हवा का सम्पर्क –

ठण्ड मे ज्यादा देर तक बाहर रहने पर जोड़ो की सतह तेज़ी से ठण्डी हो जाती है, जिससे जोड़ अकड़ जाते है और चलने – फिरने मे दर्द होता है |

खानपान मे बदलाव –

सर्दियों मे लोग तला हुआ भारी भोजन, माँस, मीठा, चाय – कॉफी, नमक आदि का सेवन ज्यादा करते है | ये सभी चीजे शरीर मे सूजन बढाती है, जिससे जोड़ो मे दर्द बढ़ता है |

पुरानी बीमारियों का दुष्प्रभाव –

गठिया ( आर्थराइटिस ) कमर दर्द, घुटनो का दर्द, सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस या सर्वाइकल डिस्क प्रोलेप्स (गर्दन की हड्डियों मे दर्द , कंधो मे दर्द, सिरदर्द और हाथो मे झनझनाहट ) से जो लोग पीड़ित होते है, उन लोगो मे ये दर्द जाड़े के मौसम मे बढ़ जाता है | इसके अलावा थायराइड, डॉयबिटीज, मोटापा, हाईपरयूरीसीमिया ( शरीर मे यूरिक एसिड का बढ़ना ), ख़राब रक्त संचार ( ब्लड सर्कुलेशन की समस्या ) से पीड़ित लोगो मे और हड्डियों मे पुरानी चोट वाले लोगो मे जाड़े मे जोड़ो का दर्द बढ़ जाता है |

प्रदूषण –

दुनियाभर मे कई शोधो ( रिसर्च ) से ये साबित हुआ है कि जब ख़राब प्रदूषित हवा और ठण्डा मौसम एक साथ आते है, तो जोड़ो मे सूजन और दर्द बढ़ा देते है |

उदासी, मानसिक तनाव और गुस्सा –

कई शोधो ( रिसर्च ) के अनुसार जाड़े मे दिन छोटे होने से मूड हार्मोन कम एक्टिव होते है | जिससे तनाव, उदासी से पीड़ित लोग, अधिक गुस्सा करने वाले लोगो मे जाड़े मे जोड़ो का दर्द बढ़ जाता है |

बढ़ती उम्र –

उम्र बढ़ने के साथ – साथ हड्डियाँ और माँसपेशियाँ कमजोर होती है | कार्टिलेज कम होने लगता है | जाड़ो मे जिसका ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ता है, और दर्द होता है |

पानी का कम सेवन –

सर्दियों मे लोग पानी कम पीते है | पानी कम पीने से शरीर मे पानी की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से जोड़ो मे अकड़न और दर्द बढ़ता है |

किन जोड़ो मे ज्यादा दर्द होता है?

वैसे तो शरीर मे सैकड़ो जोड़ है, लेकिन दर्द कुछ खास जगहों पर ज्यादा होता है, जिसको तीन मुख्य श्रेणियों मे बाटा जा सकता है,

वजन सहने वाले जोड़ –

ये वो जोड़ है, जिन पर हमारे शरीर का ज्यादा भार पड़ता है, जैसे घुटने और कूल्हे | उम्र बढ़ने, कार्टिलेज घिसने और ठण्ड मे माँसपेशियों मे कसाव आने पर जाड़े मे इन जोड़ो मे दर्द बढ़ता है |

लचीलापन देने वाले जोड़ –

लचीलापन देने वाले जोड़, जैसे कन्धा, गर्दन, रीढ़ और कमर के आस – पास के जोड़ | सर्दियों मे ठण्डी हवा के सम्पर्क मे आने पर इन हिस्सों मे दर्द बढ़ जाता है और अगर उठने – बैठने का तरीका ठीक नही है तो दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है |

छोटे और कमजोर जोड़ –

उँगलियाँ, कलाई, कोहनी, पैरो की उँगलियाँ पानी के सम्पर्क मे ज्यादा आते है | सर्दियों मे पानी के सम्पर्क मे आने के कारण इनमे दर्द बढ़ जाता है |

जोड़ो के दर्द से बचने के सामान्य उपाय :-

शरीर को ठण्ड से बचाये –

अपने शरीर को गर्म रखे, गर्म कपड़ो से पूरे शरीर को ढके | अपने सिर, गर्दन, नाक, कान, पैरो और हाथो के पंजो पर भी ध्यान दे और उनको ठण्ड से बचाये | आग से शरीर की सिकाई करे, जिसको आम बोलचाल मे आग तापना भी कहते है | कोयले या लकड़ी की आग से शरीर की सिकाई करना ज्यादा लाभदायक होता है, मगर ऐसी जगह पर आग तापे जहाँ पर धुएँ के निकलने की उचित व्यवस्थ हो |

शारीरिक सक्रिय रहे –

हल्की स्ट्रेचिंग करे, योग करे, जो लोग व्यायाम (वर्कआउट) करते है और अगर उनको जोड़ो मे दर्द की समस्या है, तो वो लोग भारी व्यायाम ना करे और ज्यादा देर तक व्यायाम ना करे |

गर्म पानी मे नमक डालकर नहाये –

गर्म पानी मे सेंधा ( लाहौरी ) नमक डालकर नहाये | इससे जोड़ो तक खून पहुँचने से सूजन और दर्द से आराम मिलता है और माँसपेशियों का कसाव भी कम होता है | साथ ही जब भी पानी के सम्पर्क मे आये तो अपने शरीर से पानी को अच्छी तरह से पोछ ले | खासकर बालो, हाथों और पैरो के पंजो, पैर के तलवो से पानी को अच्छी तरह से पोछे |

संतुलित आहार ले –

सर्दियों मे गर्म चीजे जैसे हल्दी दूध, हल्दी पानी, गुनगुना पानी, अदरक, मेथी, लहसुन, लौंग, मशरूम, दालचीनी, अश्वगंधा आदि का सेवन करे | पानी पर्याप्त मात्रा मे पीये |

शरीर का वजन काबू मे रखे –

वजन के थोड़ा सा भी कम होने पर जोड़ो पर दबाव लगभग 25 प्रतिशत तक कम हो जाता है, जिससे दर्द मे काफी हद तक आराम मिलता है |

धूप ले –

रोज़ कम से कम आधे घंटे तक धूप मे रहे | जो लोग मॉर्निंग या इवनिंग वॉक करते है वो लोग धूप मे ही वॉक करे |

जोड़ो की ऑयलिंग –

अगर दर्द ज्यादा है तो रोज़ दर्द वाले हिस्से की ऑयलिंग (हल्के हाथो से मालिश ) करे |
अगर दर्द की कोई समस्या नही है तब भी प्रत्येक व्यक्ति को महीने मे कम से कम 2 बार अपने शरीर के सभी जोड़ो की ऑयलिंग हमेशा करते रहना चाहिए | इससे जोड़ जीवनभर मज़बूत रहते है |
जोड़ो की ऑयलिंग के लिए सरसो का तेल, तिल का तेल और जैतून का तेल सर्वोत्तम होता है |
इसके साथ ही प्रतिदिन नाभि मे तेल की कुछ बूंदे डालकर सोने से बहुत लाभ मिलता है |

प्रदूषण से बचे-

प्रदूषण से बचे खासकर वायु प्रदूषण से बचे | जहाँ पर हवा दूषित हो वहाँ पर मुँह और नाक को मास्क से ढके या रुमाल आदि कपड़े से ढके |

तनाव और उदासी से बचे –

तनाव और उदासी से मूड हार्मोन कम एक्टिव होते है और जोड़ो का दर्द बढ़ जाता है | पर्याप्त मात्रा मे नींद ले | तनाव और उदासी से बचे |

सप्लीमेन्ट का सेवन –

डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी, विटामिन बी – 12, विटामिन सी, ओमेगा – 3 , कैल्शियम सप्लीमेंट का सेवन करे|

शरीर की मुद्रा (बॉडी पॉस्चर) –

उठने, बैठने, चलने, दौड़ने, खड़े होने, व्यायाम करते समय, दो पहिया – चार पहिया जैसे वाहन चलाते समय बॉडी पॉस्चर ठीक होना चाहिए | गलत पॉस्चर से जोड़ो का दर्द बढ़ता है |

आर्थोडिक या सपोर्टिंग डिवाइस –

फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर की सलाह से हीटिंग पैड, हीट थेरेपी बेल्ट, जॉइंट सपोर्टर जैसे डिवाइस का उपयोग कर सकते है |

बुज़ुर्गो और बीमार लोगो का विशेष ध्यान –

घर के बुज़ुर्ग लोग और बीमार लोगो पर विशेष ध्यान दे | उनको ठण्ड से बचाये और उनकी सेवा करे |

दर्द से निवारण के विशिष्ट उपाय :-

“अगर सामान्य तरीके अपनाने के बाद भी दर्द ठीक नही हो पा रहा है तो कुछ विशिष्ट उपाय आज़माने चाहिए ” –

फिजियोथेरेपी –

फिजियोथेरेपिस्ट छोटे – बड़े जोड़ो की ज़रूरत के अनुसार टेन्स, शार्ट वेव डायथर्मी, वैक्स थेरेपी आदि के द्वारा दर्द से आराम दिलाते है | फिजियोथेरेपी मे एक उन्नत और प्रसिद्ध तकनीक, अल्ट्रासाउंड थेरेपी के द्वारा दर्द वाले हिस्सों मे हल्की ध्वनि तरंगे भेजकर गहरे ऊतको मे गर्माहट पैदा की जाती है, जिससे दर्द मे बहुत आराम मिलता है |

आयुर्वेदिक पद्धति –

हजारों साल पुरानी इस भारतीय पद्धति मे जानू बस्ती, कटि बस्ती, गर्म हर्बल पोटली, और अभ्यांग मालिश जैसी विधियों से शरीर के सभी जोड़ो, माँसपेशियों और नसो के दर्द मे आराम मिलता है | इसके अलावा नस्य थेरेपी जिसमे जड़ी – बूटियों से बनी औषधियों का तेल बनाकर नाक मे डालते है, जिससे सिर दर्द, कंधे और गर्दन के दर्द मे बहुत आराम मिलता है |

प्रोलोथेरेपी –

इसमें लिगामेंट या टेंडन के पास इंजेक्शन लगाते है | जोड़ो के दर्द, पुरानी चोटों के दर्द, खिचाव, अकड़न को दूर करने की ये विश्वप्रसिद्ध थेरेपी है |

एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर –

एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर दोनों ही पारम्परिक चीनी चिकित्सा के रूप हैं |

एक्यूप्रेशर –

एक्यूप्रेशर में शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर हाथों या उपकरणों का उपयोग करके दबाव डाला जाता है। यह दबाव शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने और दर्द को कम करने में मदद करता है।

एक्यूपंक्चर –

एक्यूपंक्चर में शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर पतली सुईयों का उपयोग करके ऊर्जा को उत्तेजित किया जाता है। यह ऊर्जा शरीर की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रियाओं को बढ़ावा देती है और दर्द को कम करती है।

दोनों ही तकनीकें दर्द प्रबंधन मे बहुत लाभदायक है |

सुजोक –

सुजोक एक कोरियाई चिकित्सा पद्धति है जो शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव डालकर दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने में मदद करती है। सुजोक में हाथ और पैर के विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है, जो शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों से जुड़े होते है |

पी.आर.पी. थेरेपी –

इसमें जिस व्यक्ति को दर्द की समस्या है, उस व्यक्ति के खून का प्लाज़्मा दर्द वाले जोड़ मे डालकर ऊतको की मरम्मत करके दर्द से छुटकारा दिलवाते है |

ओजोन थेरेपी –

इसमें हल्की मात्रा मे ओजोन गैस दर्द वाले जोड़ो के पास दी जाती है, जिससे दर्द और सूजन से राहत मिलती है |

लेजर थेरेपी –

हाई – इंटेंसिटी लेजर थेरेपी जोड़ो की गहराई तक और जल्दी आराम देने वाली थेरेपी है | इस थेरेपी से जोड़, माँसपेशियों और नसों मे शीघ्र ही आराम मिलता है |

पल्स्ड इलेक्ट्रोमैग्नैटिक फील्ड थेरेपी (P.E.M.F.) –

इसमें मैग्नैटिक तरंगे दर्द वाले जोड़ो के आस – पास भेजी जाती है, जिससे सूजन, अकड़न और दर्द मे आराम मिलता है |

हाइड्रोथेरेपी –

इस थेरेपी मे हल्के गर्म पानी की जेट धारा को जोड़ पर दबाव डालकर डाला जाता है | इस थेरेपी मे व्यक्ति को पानी के अन्दर कई तरह के व्यायाम भी कराये जाते है | जिससे दर्द मे आराम मिलता है |

कपिंग थेरेपी –

कपिंग थेरेपी एक पारम्परिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें कप या ग्लास का उपयोग करके शरीर के विशिष्ट हिस्सों पर वैक्यूम बनाया जाता है, जिससे रक्त संचार में सुधार होता है और दर्द, सूजन, और तनाव कम होता है |