स्लीप एपनिया: नींद में बार-बार सांस रुकना – लक्षण, कारण और उपाय

स्लीप एपनिया के लक्षण sleep apnea symptom

स्लीप एपनिया क्या है?

रात में सोते समय अक्सर बहुत से लोगो की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। इन कुछ सेकंड में दम घुटने जैसा महसूस होता है। ये स्लीप एपनिया के लक्षण है।

ज्यादातर लोगो की 10 सेकंड से 40 सेकंड तक़ सांस रुक जाती है।

40 सेकंड से ज्यादा देर तक़ सांस रुक रही है तो ये बहुत ही हानिकारक है।

स्लीप एपनिया के गंभीर मामलो में व्यक्ति की एक घंटे में 30 बार और पूरी रात में 200 से ज्यादा बार भी सांस रुक सकती है।

ये सिर्फ नींद की मामूली बीमारी नही है, इसका दिल और दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

स्लीप एपनिया के लक्षण

• स्लीप एपनिया में रात में तेज़ खर्राटे आते है। बीच-बीच में खर्राटे रुक जाते है। सांस थोड़ी-थोड़ी देर के लिए रुक जाती है, फिर चलने लगती है।

• मगर खर्राटे आने का ये मतलब नही है कि सभी खर्राटे लेने वाले व्यक्ति के स्लीप एपनिया है। स्लीप एपनिया में खर्राटे के साथ-साथ सांस भी रुक-रुक कर चलती है। जबकि खर्राटे लेने वाले व्यक्ति, जिसको स्लीप एपनिया नही है, उसकी सांस नही रूकती है और वो आराम से सोता रहता है।

• एक बात और महत्वपूर्ण है कि स्लीप एपनिया से पीड़ित लगभग 20 परसेंट लोग ऐसे भी होते है, जिनको खर्राटे बिल्कुल भी नही आते, इसको साइलेंट स्लीप एपनिया बोलते है।

• अधिकतर लोगो को नींद में सांस रुकने की वजह से दम घुटना जैसा महसूस होता है।

• नींद में सांस रुकने की वजह से दम घुटता है तो व्यक्ति हॉफकर उठ जाता है।

• सुबह उठकर हल्का सिर दर्द होता है। होंठ और गला सूखा हुआ सा लगता है।

स्लीप एपनिया के लक्षण

• दिन भर शरीर थका हुआ सा महसूस होता है।

• दिन में नींद आती रहती है।

• काम में ध्यान केंद्रित नही हो पाता है।

• चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।

• याददाश्त कमजोर होती जाती है और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है, जिसे ब्रेन फॉग भी कहा जाता है।

स्लीप एपनिया के प्रकार

1- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA)

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) एक ऐसी स्थिति है जिसमें रात में सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली होकर सांस की नली को बार-बार ब्लॉक कर देती हैं।

2- सेन्ट्रल स्लीप एपनिया ( CSA )

सेंट्रल स्लीप एपनिया (CSA) में दिमाग सोते समय सांस लेने वाली मांसपेशियों को सही सिग्नल नहीं भेज पाता है, जिससे सांस बार-बार रुकती है फिर चलती है, ऐसा बार-बार होता रहता है।

3- मिक्स्ड स्लीप एपनिया

मिक्स्ड स्लीप एपनिया एक गंभीर समस्या है क्योंकि इसमें दोनो मुख्य प्रकार के स्लीप एपनिया 

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया दोनों के लक्षण, एक साथ पाए जाते हैं। 

इसमें सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली होकर सांस की नली को बार-बार ब्लॉक कर देती हैं और दिमाग सोते समय सांस लेने वाली मांसपेशियों को सही सिग्नल नहीं भेज पाता है, जिससे सांस बार-बार रुकती है।

किन लोगों को स्लीप एपनिया का खतरा ज्यादा है?

• जो लोग पीठ के बल पर सोते है, करवट लेकर नही सोते है।

• मोटे लोगो को, खासकर जिनकी गर्दन भी मोटी है।

• तकिया ना लगाने वाले लोग।

• जिन लोगो की नाक अक्सर बंद रहती है।

• जिनकी नाक की हड्डी टेढ़ी है या जबड़े की बनावट सीधी नही है।

• जिन लोगो को साइनस की समस्या है।

• इन्फेक्शन, वायरल आदि कारणों से जिन लोगो के गले में टांसिल बड़े हो गए है।

• शराब और सिगरेट पीने वाले लोगो को।

• नशीली दवाएं, ड्रग्स, गांजा आदि का सेवन करने वालो को।

• नींद की दवाई खाने वालो को।

• महिलाओ की तुलना में पुरुषों में इसका खतरा 3 गुना ज्यादा होता है।

• जिन लोगो के परिवार में पहले से ही किसी को स्लीप एपनिया है।

स्लीप एपनिया से बचने के घरेलू उपाय

• करवट होकर सोएं। पीठ के बल सोना बंद कर दे। सोने के लिए जब बिस्तर पर लेटे तो कोशिश करे कि बाएँ करवट पर ज्यादा देर सोएं।

• तकिया ज़रूर लगाकर सोएं। तकिया थोड़ा सा ऊँचा होना चाहिए ताकि आपका सिर भी थोड़ा सा ऊँचा रहे।

• सोने का एक समय फिक्स करे। ऐसा ना हो कि कभी आप रात 10 बजे सो रहे है, कभी 12 बजे और कभी 1 बजे।

रोज सोने का एक ही समय बनायें।

• रात में सोने से पहले मोबाइल ना चलाये।

• शराब और सिगरेट कभी ना पिएं। जो लोग शराब, सिगरेट पीते है वो बंद कर दे, या कम कर दे।

   स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगो के लिए रात में सोने से पहले शराब और सिगरेट पीना बहुत हानिकारक है।

• गांजा, ड्रग्स, नशीली दवाओं आदि का सेवन ना करे। रात में सोने से पहले ऐसी नशीली चीजों का सेवन बहुत हानिकारक है।

• अपने शरीर का वजन कम करे।

योग, जिम , रनिंग, वाकिंग जैसी कोई भी एक्सरसाइज करे।

• वजन कंट्रोल में रखे, अगर वजन ज्यादा है तो उसको कम करे।

• अगर नाक अक्सर बंद रहती है तो इसका इलाज़ करवाये।

• नींद की गोलियों का सेवन कभी ना करे।

डॉक्टर को कब दिखाना है ?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी रात में सोते समय अगर –

• सांस रुकना, दम घुटना जैसा महसूस होना बंद नहीं हो रहा है।

• सोते समय हफ्ते में 3 बार या उससे ज्यादा बार सांस रुक रही है।

• 40 सेकंड से ज्यादा देर तक़ सांस रुक रही है और खर्राटे भी बहुत तेज़ आ रहे है।

• कभी-कभी रात में सीने में दर्द की वजह से या दिल की धड़कन तेज होने से नींद खुल जाती है। 

• सुबह उठने पर सिर में दर्द होता है और मुँह, गला सूखा हुआ सा लगता है।

• दिन में बार-बार नींद आ रही है, खासकर तब जब आप गाड़ी चला रहे है और उस समय भी बार-बार नींद की झपकी आ रही है।

• आपको बीपी, हार्ट और शुगर की समस्या पहले से ही है।

अगर इलाज नहीं करवाया तो क्या – क्या खतरे हैं?

अगर ये सब लक्षण है और आप डॉक्टर से इलाज नहीं करवाएंगे तो –

• हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 3 गुना ज्यादा बढ़ जायेगा।

• रात में 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच कार्डियक डेथ ( अचानक से दिल की धड़कन रुकने से मौत ) का खतरा 2.5 गुना ज्यादा बढ़ जायेगा।

• टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 2 गुना ज्यादा बढ़ जायेगा।

• डिप्रेशन हो जायेगा, और अगर पहले से ही डिप्रेशन के शिकार है तो डिप्रेशन बहुत ज्यादा बढ़ जायेगा।

• दिन में नींद आने की वजह से गाड़ी चलाते समय रोड एक्सीडेंट का खतरा 7 गुना ज्यादा बढ़ जायेगा।

आपने कई बार सुना होगा कि ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय नींद आ गयी, जिसकी वजह से एक्सीडेंट हो गया। इसका एक मुख्य कारण स्लीप एपनिया है।

Wisconsin Sleep Cohort Study के अनुसार अगर कोई स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति 

हार्ट पेशेंट भी है,

या रात में शराब पीकर सोता है, 

या नींद की गोलियाँ खाता है,

या व्यक्ति का कोई ऑपरेशन होना है और ऑपरेशन के पहले व्यक्ति को बेहोशी की दवाई दी गयी है, 

तो इन सभी स्थितियों में व्यक्ति के नींद में सोते-सोते ही मरने का खतरा 5 गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

किस डॉक्टर को दिखाएं?

स्लीप एपनिया एक ऐसी जटिल समस्या है कि स्लीप एपनिया के कई मामलो में अलग-अलग डॉक्टर की मदद की ज़रूरत पड़ती है।

स्लीप एपनिया में पल्मोनोलॉजिस्ट ( चेस्ट रोग विशेषज्ञ ) या स्लीप स्पेस्लिस्ट , 

ENT ( कान, नाक, गला ) सर्जन , 

न्यूरोलॉजिस्ट और 

डेंटिस्ट की भी मदद लेनी पड़ सकती है।

पल्मोनोलॉजिस्ट (चेस्ट रोग विशेषज्ञ) या स्लीप स्पेस्लिस्ट

सबसे पहले किसी 

 पल्मोनोलॉजिस्ट ( चेस्ट रोग विशेषज्ञ ) या किसी स्लीप क्लिनिक में दिखाए।

अब कई प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल में भी स्लीप स्पेस्लिस्ट बैठते है।

 पल्मोनोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेस्लिस्ट, मरीज़ की शुरूआती जाँच करवाते है। मरीज़ की स्लीप स्टडी करवाते है। जाँच और स्लीप स्टडी से स्लीप एपनिया होने की मुख्य वजह का पता लगाया जाता है।

अब स्लीप स्टडी घर पर भी करवाने की सुविधा उपलब्ध है।

 पल्मोनोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेस्लिस्ट ज़रूरत पड़ने पर सांस को बिना रुके चालू रखने की मशीन CPAP लगाते है।  

CPAP मशीन से स्लीप एपनिया का इलाज

CPAP मशीन रात में सोते समय नाक पर इस तरह से दबाव डालती है कि नाक और गला बंद ना हो और मरीज़ की सोते समय सांस ना रुके।

मरीज़ के स्लीप टेस्ट और कुछ शुरुआती जाँच के बाद पल्मोनोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेस्लिस्ट ये तय करते है कि मरीज़ को डेंटिस्ट, ENT सर्जन या न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाने की ज़रूरत है या नही है, या फिर इन तीनो में से किसको दिखाने की ज़रूरत है।

डेंटिस्ट

अगर जबडे की बनावट सही नही है तो पल्मोनोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेस्लिस्ट इसके समाधान के लिए डेंटिस्ट की भी मदद लेते है।

डेंटिस्ट मरीज़ के दाँतो पर ओरल डिवाइस लगाते है, जिसकी वजह से जबड़ा आगे की ओर रहता है। जिससे मरीज़ की सांस नही रूकती है।

अगर जबड़े का ऑपरेशन करने की ज़रूरत पड़ती है तो डेंटिस्ट के ही स्पेशल एक्सपर्ट रूप ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन जबड़े की सर्जरी करके सांस लेने की हवा का रास्ता बनाते है, ताकि सोते समय सांस ना रुके।

ENT (कान, नाक और गला) सर्जन

कुछ मरीज़ों में स्लीप एपनिया होने का कारण उनके नाक और गले की अंदरूनी शारीरिक बनावट होती है।

इन मरीज़ों में नाक की हड्डी टेढ़ी होती है, गले में टांसिल काफी बड़े होते है, गले का सांस लेने वाला रास्ता काफी छोटा होता है।

ENT सर्जन नाक और गले की जाँच करते है और ज़रूरत होती है तो नाक की टेढ़ी हड्डी, बड़े टांसिल और गले के छोटे रास्ते की सर्जरी करते है, जिसके बाद इन मरीज़ों को बहुत लाभ मिलता है।

न्यूरोलॉजिस्ट

 स्लीप एपनिया का एक खतरनाक प्रकार सेन्ट्रल स्लीप एपनिया है। इसमे दिमाग़ सोते समय अक्सर सांस लेने का सिग्नल देना भूल जाता है, जिसकी वजह से मरीज़ की सांस रुक-रुक कर चलती है। इस स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट की सहायता ली जाती है।

अब आप अच्छी तरह से समझ चुके होंगे कि स्लीप एपनिया एक साइलेंट किलर है जो चुपचाप जान लेता है।

मगर समय पर इसकी पहचान और उचित इलाज से पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते है, बस इसके लक्षणों को पहचाने, घरेलू उपाय अपनाएं और डॉक्टर से अपना इलाज़ करवाएं।

स्वस्थ रहे और सुखी जीवन जियें।