प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली *आयुर्वेद* के अनुसार तांबे के बर्तन मे रखा हुआ पानी तांबे को अवशोषित कर लेता है। यह पानी एक प्रकार की औषधि ( मेडिसिन ) बन जाता है। ऐसे पानी को आयुर्वेद मे ताम्रजल कहा गया है।
ये पानी शरीर के तीनो दोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है और पूरे शरीर को लाभ पहुँचाता है।
तांबे मे एंटी – माइक्रोबियल गुण होते है जो पानी को शुद्ध करने मे मदद करते है। इसीलिए पुराने ज़माने मे लोग नदियों, तालाबों और कुओं मे तांबे के सिक्के ड़ालते थे ताकि इससे पानी शुद्ध रहे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तांबे के बर्तन मे कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी, तांबे को अच्छी तरह से अवशोषित कर लेता है। 8 घंटे के बाद ही इस पानी को पीने से अधिकतम लाभ मिलता है।
तांबे के बर्तन का पानी पीने के मुख्य लाभ

तांबे के बर्तन मे कम से कम 8 घंटे तक रखे हुए पानी को रोज 2 से 3 गिलास पीने से कई तरह के लाभ मिलते है –
:“वैज्ञानिक शोध के अनुसार, तांबे के पानी के स्वास्थ्य लाभ अनेक हैं…”
1- पेट के लिए लाभदायक
इस पानी को रोज लगातार 3 महीने तक पीने से पेट की कई तरह की समस्याएं दूर होती है, जैसे कि –
- भोजन के साथ शरीर मे आये हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट होते है।
- इससे एसीडिटी, गैस और अपच की समस्याएं दूर होती है।
- पेट अच्छी तरह से साफ होता है जिसकी वजह से कब्ज दूर होता है और पेटदर्द जैसी समस्या भी नही होती है।
- आँतो की अच्छी तरह से सफाई होती है।
- खतरनाक टॉक्सिंन ( विषैले पदार्थ ) शरीर के बाहर निकल जाते है।
- मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है।
- पाचन तंत्र एक्टिव होता है।
- भूख नियंत्रण मे रहती है।
- अल्सर जैसी पेट की गंभीर बीमारी मे भी तांबे के बर्तन का पानी पीने से बहुत लाभ मिलता है।
- पेट की सूजन भी इस पानी के सेवन से कम होती है।
2- हड्डियों और जोड़ो के लिए लाभदायक
तांबे मे सूजनरोधी गुण होते है। तांबे के बर्तन मे पानी पीने से आर्थराइटिस ( गठिया वात ) और रुमेटाइड आर्थराइटिस से होने वाली सूजन और दर्द से आराम मिलता है।
इस तांबे के पानी को पीने से हड्डियाँ और जोड़ मज़बूत होते है।
3- डायरिया, पेचिश और पीलिया मे लाभदायक
💡 वैज्ञानिक तथ्य : तांबे मे ओलिगो डायनामिक गुण होते है, जिससे ई-कोलाई (E.coli) और एस. ऑरिएस जैसे खतरनाक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते है। ये दोनों बैक्टीरिया ही डायरिया, पेचिश और पीलिया जैसी हानिकारक बीमारियों के मुख्य कारक है। तांबे के बर्तन का पानी पीने से ये बीमारियां नही होती है।
4- इम्यून सिस्टम ( प्रतिरक्षा प्रणाली ) मे सुधार
तांबे मे एंटी ऑक्सीडेंट गुण होता है जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है, जिसके कारण बीमारियों से बचने और बीमारियों से लड़ने मे सहायता मिलती है।
5- किडनी के लिए लाभदायक
तांबे के बर्तन का पानी शरीर से व्यर्थ ( बेकार ) पदार्थो को शरीर से बाहर निकालता है, पोषक पदार्थो के अवशोषण मे सहायता करता है, और किडनी की कार्यप्रणाली को संतुलित करता है।
6- वजन कम करने मे सहायक
तांबे का पानी गैस, अपच को दूर करता है। शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते है। तांबे के पानी से पाचन तंत्र एक्टिव होता है, मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है और भूख नियंत्रण मे रहती है,
जिसकी वजह से वजन कम करने मे भी सहायता मिलती है।
तांबे के पानी के सेवन में सावधानियाँ

लम्बे समय तक अधिक मात्रा मे तांबा शरीर मे जाने पर, ये तांबा फायदा पहुँचाने की जगह नुकसान पहुँचाने लगता है, इसलिए तांबे के पानी का सेवन करने के लिए कुछ सावधानियाँ ज़रूरी है –
1. तांबे के बर्तन मे रातभर ( लगभग 8 घंटे तक ) पानी रखे और सुबह खाली पेट 1 से 2 गिलास पीये, तब इसका विशेष लाभ मिलता है।
2. पूरे दिन मे ( 24 घंटे मे ) 3 गिलास से ज्यादा इस पानी को ना पीये, बाक़ी सारा दिन नार्मल पानी पीये।
3. लगातार 3 महीने तक इस पानी को पीये और फिर 30 से 45 दिन का गैप ले और 30 से 45 दिन के बाद फिर से इसको पीना शुरू करे।
4. हमेशा अच्छी क्वालिटी वाले, बिना कोटिंग वाले तांबे के बर्तन का उपयोग करे।
5. इन बर्तनो को अच्छी तरह से साफ रखे।
6. इन बर्तनो मे कभी भी खट्टी चीजें, दूध, दही आदि ना रखे।
किन लोगो को ये पानी नही पीना चाहिए
जिन लोगो को पित्त की समस्या है, जिन लोगो की साँस फूलती है और जो लोग जल्दी हाँफ़ जाते है, ऐसे लोग तांबे के पानी को कभी ना पीये।
तांबे के बर्तन में पानी पीने के लाभों को जानने के बाद, इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें और स्वस्थ जीवन का आनंद लें।
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