कम उम्र में मसल्स कमजोर ; कही आपको सार्कोपेनिया तो नही ?

 जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे हमारी बॉडी में मौजूद मसल्स ( मांसपेशियां ) घटती जाती है। उम्र बढ़ने के साथ हमारी मांसपेशियों की ताकत कम होती जाती है।

सभी बुजुर्गों में ये समस्या होती है, लेकिन अब 30-35 साल की उम्र वालो में भी मसल्स घटने और कमज़ोर होने की समस्या बहुत बढ़ गयी है, ये सार्कोपेनिया की वजह से होता है।

आंकड़े बताते है कि आज से सिर्फ 30 साल पहले तक़ भारत में सार्कोपेनिया से कोई युवा पीड़ित ही नही होता था, लेकिन अब सार्कोपेनिया से पीड़ित युवाओं की संख्या देश में बढ़ती ही जा रही है।

सार्कोपेनिया से पीड़ित इन लोगो की जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे इनकी समस्याएं भी बढ़ती जाती है और इनकी सारी ताकत कम होती जाती है और एक समय ऐसा आता है कि ये लोग उठने, बैठने, चलने के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो जाते है। 

साल 2024 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार भारत में 35 साल की उम्र से ऊपर के लगभग 28 प्रतिशत लोग सार्कोपेनिया से पीड़ित है, जो कि एक गंभीर समस्या है।

मगर इससे भी ज्यादा गंभीर समस्या ये है कि ज्यादातर लोगो को सार्कोपेनिया के बारे में कुछ नही पता है। यहाँ तक़ कि जो लोग खुद ही सार्कोपेनिया से पीड़ित है, वो लोग भी इससे अनजान है।

अधिकतर लोगो ने तो सार्कोपेनिया का नाम तक़ नही सुना होगा।

सार्कोपेनिया का बुरा असर

सार्कोपेनिया की वजह से व्यक्ति में 

• नर्वस सेल्स कम होने लगते है।

• ग्रोथ हार्मोन का लेवल घटता जाता है।

• मज़बूत मांसपेशियों, एनर्जी और सेक्स लाइफ के लिए सबसे ज़रूरी टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन कम होते जाते है।

• सार्कोपेनिया की वजह से ग्रोथ मांसपेशिया बनाने वाले और सेल रिपेयर के लिए बेहद ज़रूरी IGF-1 हार्मोन की कमी होती जाती है।

• मांसपेशियां कमज़ोर होती जाती है, और धीरे-धीरे सिकुड़ती जाती है।

• हड्डिया कमज़ोर होती जाती है जिसकी वजह से फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता जाता है।

• मेटाबॉलिज़्म स्लो हो जाता है।

• दिखने में व्यक्ति तंदरुस्त लगता है मगर शरीर अन्दर से कमज़ोर होता जाता है।

• कुछ लोगो में मोटापा बढ़ जाता है।

लक्षण

सार्कोपेनिया अचानक से होने वाली कोई बीमारी नही है, बल्कि ये एक साइलेंट समस्या है जो चुपचाप आती है और इसके लक्षण धीरे-धीरे उभर कर आते है।

Cleveland Clinic के अनुसार” समय रहते इन लक्षणों को पहचानना बहुत ज़रूरी है।

सार्कोपेनिया के लक्षण

"सार्कोपेनिया के लक्षण"

• शरीर की ताकत कम होती जाती है।

• छोटे-छोटे काम भी मुश्किल हो जाते है। व्यक्ति जल्दी थक जाता है।

• सीढ़िया चढ़ने में बहुत परेशानी होती है।

• पैर कमज़ोर हो जाते है।

• लम्बे समय तक़ खड़े रहने में और थोड़ा सा भी पैदल चलने में भी कठिनाई होती है।

• चलने की गति भी धीमी हो जाती है, व्यक्ति तेज़ नही चल पाता है।

• कमज़ोर पैर की वजह से बॉडी का बैलेंस नही बन पाता है। कई बार व्यक्ति लड़खड़ा जाता है।

• सार्कोपेनिया से पीड़ित कुछ लोगो में मोटापा बढ़ जाता है। हालांकि ये लोग भी अन्दर से कमज़ोर होते जाते है।

क्यों होता है सार्कोपेनिया

 लोगों में सार्कोपेनिया होने के कई कारण है:

• बढ़ती उम्र।

• ख़राब लाइफस्टाइल।

• असंतुलित आहार।

• कुपोषण।

• प्रोटीन और विटामिन डी की कमी।

• शारीरिक सक्रियता में कमी ( फिजिकली इंएक्टिव रहना ), ज्यादातर समय लेटे या बैठे रहना। शारीरिक मेहनत वाला कोई भी काम ना करना।

• किसी भी तरह की एक्सरसाइज ना करना।

• अधूरी नींद।

• नशा।

• तनाव ( टेंशन )।

• स्क्रीन टाइम ज्यादा देना ( मोबाइल, लैपटॉप, टीवी का अधिक उपयोग )।

• किडनी और लीवर डिजीज।

• डायबिटीज और इन्सुलिन रेसिसटेंस।

• रुमेराइड आर्थराइटिस।

• न्यूरोलॉजिकल समस्याएं।

• क्रॉनिक बीमारी ( लम्बी अवधि वाली बीमारी )।

• दवाइयों का साइड इफेक्ट।

• हार्मोनल बदलाव।

• मोटापा।

• अनियंत्रित और अनियमित बीपी।

• महिलाओं में मेनोपॉज के बाद।

सार्कोपेनिया से बचने के उपाय

सार्कोपेनिया से बचाव के लिए संतुलित आहार (Balanced diet for sarcopenia prevention)"

• संतुलित आहार ले। दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, दाले, रागी, अलसी, तिल, बाजरा, अखरोट, चिया सीड्स, संतरा, नींबू, आंवला, टमाटर, गाजर, पालक, मेथी समेत सभी हरी सब्जियों को अपने भोजन में शामिल करे।

• फिजिकली एक्टिव रहे। कोई ना कोई शारीरिक मेहनत वाला काम ज़रूर करें। हर समय लेटे या बैठे ना रहे।

• सुबह 20 मिनट सूरज की धूप ले।

• मोबाइल, लैपटॉप, टीवी का उपयोग कम से कम करे।

• जो लोग कंप्यूटर पर काम करते है, वो हर घंटे में 3 मिनट के लिए उठकर थोड़ा टहल ले, बॉडी को थोड़ा मूव करे।

• बैठते और चलते समय अपनी पीठ को सीधा रखे, झुककर ना बैठे और चलते समय कंधे और पीठ को झुकाकर ना चले।

• बीपी और शुगर कंट्रोल में रखे।

• मोटापा ना बढ़ने दे।

• कोई भी एक एक्सरसाइज करे।

• सार्कोपेनिया से बचाव और राहत के लिए जिम की एक्सरसाइज सबसे बेस्ट है।

जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ले, बहुत लाभ मिलता है।

• जो लोग किसी भी तरह की एक्सरसाइज नहीं कर सकते वो लोग कम से कम आधे घंटे तक़ मॉर्निंग या इवनिंग वॉक ज़रूर करे।

• रोज 8 से 9 घंटे की भरपूर नींद पूरी करे।

• क्रॉनिक ( लम्बी अवधि वाली ) बीमारियों से बचे।

• किसी भी तरह का नशा ना करे। अगर किसी नशे की लत है तो उसको बंद करे या कम कर दे।

• तनाव से दूर रहे, चिन्ता ना करे। ख़ुश रहने की कोशिश करे।

• अगर कमजोरी ज्यादा महसूस होती है तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंटस ले।

डॉक्टर को कब दिखाएं

 यदि लाइफस्टाइल में सही बदलाव करके, अच्छे और संतुलित आहार से, एक्सरसाइज करने और तनावमुक्त होकर, भरपूर नींद लेने के बाद भी सार्कोपेनिया की समस्या कम नही हो रही है तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

सबसे पहले जनरल फिजिशियन को दिखाएं।

फिजिकल मेडिसिन और रिहैबिलीटेशन स्पेशलिस्ट         ( फिजियाट्रिस्ट ) और जेरिएट्रिशियन को भी दिखा सकते है।

 फिजियोथेरेपिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट की भी मदद ली जा सकती है। 

हालांकि अधिकतर लोगों को डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नही पड़ती है।

बस सार्कोपेनिया के लक्षणो को पहचाने, क्योंकि ये एक साइलेंट समस्या है जो चुपचाप धीरे-धीरे आती है।

➡️अच्छी और संतुलित लाइफस्टाइल,
➡️अच्छी डाइट,
➡️रेगुलर एक्सरसाइज,
➡️तनाव मुक्त जीवन,
➡️भरपूर नींद,
➡️नशे से दूरी,
➡️टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर का कम उपयोग,
➡️बीपी, शुगर, मोटापा और क्रॉनिक बीमारियों को कंट्रोल करके
सार्कोपेनिया से काफी हद तक़ बचा जा सकता है।

उम्र बढ़ना, बुढ़ापा आना तो तय है, मगर बढ़ती उम्र में भी मसल्स को मज़बूत बनाये रखा जा सकता है।