दुनिया में सभी लोगो के घरों में बर्तन धुले जाते है। पहले के समय में चूल्हे या अंगीठी की राख़ से बर्तनों को मांजा जाता था। बहुत से लोग मिट्टी से बर्तनों को मांजते थे। फिर इन बर्तनों को पानी से अच्छी तरह से धुला जाता था।
समय के साथ बर्तन धुलने के तरीको में भी बदलाव हुआ है। अब बर्तन धुलने के लिए डिशवाशिंग लिक्विड और सोप ( डिशवाशिंग साबुन ) का इस्तेमाल होने लगा है।
बर्तनों का चुनाव भी सेहत पर असर डालता है — जैसे (तांबे के बर्तन मे पानी पीने के क्या फायदे है।), उसी तरह बर्तन धोने का तरीका भी मायने रखता है।
इन डिशवाशिंग लिक्विड और सोप से बर्तन अच्छी तरह से साफ हो जाते है। गाढ़ी से गाढ़ी चिकनाई और खाने-पीने की गन्दगी पूरी तरह से साफ हो जाती है। बर्तन पूरी तरह से चमक जाते है।
मगर इस डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में बहुत ही हानिकारक केमिकल्स होते है। अगर बर्तनों को अच्छी तरह से रिन्स ना किया जाएं ( बर्तनों को बहते पानी में धोने को रिन्स बोलते है ) तो ये हानिकारक केमिकल्स खाने के साथ हमारे शरीर में आ जाएंगे।
ये केमिकल्स सूक्ष्म कणों के रूप में बर्तन पर रहते है जो आँखों से दिखाई नही देते है।
आपको लगेगा कि रिन्स करने के बाद बर्तन चमक रहे है, मगर उनमे केमिकल्स होते है।
डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में मौजूद केमिकल्स

डिशवाशिंग लिक्विड और सोप बनाने वाली सभी कम्पनी डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में इन केमिकल्स का इस्तेमाल करती है।
कुछ कम्पनी ज्यादा मात्रा में केमिकल्स का इस्तेमाल करती है और कुछ कम्पनी कम मात्रा में केमिकल्स का इस्तेमाल करती है।
कुछ कम्पनी कम हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल करती है और कुछ कम्पनी अधिक हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल करती है।
सोडियम लॉरिल सल्फ़ेट और सोडियम लॉरिल ईथर सल्फ़ेट
ज्यादातर कम्पनी डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में सोडियम लॉरिल सल्फ़ेट और सोडियम लॉरिल ईथर सल्फ़ेट जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल करती है, जिसकी वजह से बर्तनो की चिकनाई साफ होती है।
अल्कोहल एथाक्सीलेट्स, फास्फेट्स और ट्राइक्लोसन
अधिकतर कम्पनी डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में अल्कोहल एथाक्सीलेट्स, फास्फेट्स और ट्राइक्लोसन जैसे खतरनाक केमिकल्स मिलाती है, जिनसे बर्तनो में जमी गंदगी हटती है, बर्तनो की अच्छी तरह से सफाई होती है और बैक्टीरिया खत्म होते है।
ज्यादातर कम्पनी डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में खुशबू के लिए सिंथेटिक फ्रेगरेंस मिलाती है और खुशबू को लम्बे समय तक़ रोकने के लिए थैलेट्स आदि का उपयोग करती है।
FDA की फ्रेगरेंस रिपोर्ट के मुताबिक, सिंथेटिक खुशबू से कई तरह की एलर्जी और सांस सम्बन्धी दिक्कतें हो सकती हैं।
इन लिक्विड और सोप की शेल्फ लाइफ बरकरार रखने के लिए ( इनको ख़राब होने से बचाने के लिए ) फार्मेल्डिहाइड और प्रिजवेंटिस जैसे केमिकल्स को मिलाया जाता है।
इन लिक्विड और सोप को रंग देने के लिए डाइ और आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल किया जाता है।
जब डिशवाशिंग लिक्विड या सोप का निर्माण किया जाता है तब अपने आप ही इसमें 1,4 डाइऑक्सेन जैसा खतरनाक टॉक्सिक भी बन जाता है।
अगर बर्तनों को अच्छी तरह से रिन्स ( बहते पानी से धुलाई ) ना किया जाये, तो ये हानिकारक केमिकल्स खाने के साथ हमारे शरीर में चले जायेंगे जिनकी वजह से:
• मुँह और गले में जलन
• पेट में दर्द और जलन
• उल्टी, मतली
• दस्त
• स्किन एलर्जी, रैशेज
• सांस लेने में कठिनाई
जैसी समस्याएं हो सकती है।
अगर ये केमिकल्स लम्बे समय तक हमारे शरीर में जाते रहेंगे तो,
• अस्थमा
• आंतो की लेयर डैमेज
• लीवर और किडनी डैमेज
• हार्मोनल असंतुलन
• प्रजनन क्षमता में कमी
जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती है।
इन केमिकल्स की वजह से व्यक्ति को कैंसर भी हो सकता है क्या ?
दुनिया भर में कई एक्सपर्ट द्वारा ये सवाल उठाया गया है, कि डिशवाशिंग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स से कैंसर हो सकता है क्या ?
इसकी कई रिसर्च दुनियाभर में चल रही है।
अधिकतर डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में खुशबू के लिए आर्टिफिशियल फ्रेंगरेंस होती है।
जिसको इनहेल करने से ये सांस के साथ शरीर में आ जाती है, जिसकी वजह से
• अस्थमा
• सांस सम्बन्धी समस्याएं
• एलर्जी
• नाक और गले में जलन
• त्वचा सम्बन्धी समस्याएं
• छींक
• सिर दर्द
जैसी समस्याएं हो सकती है।
किन लोगो के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है ?
डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में मौजूद हानिकारक केमिकल्स और फ्रेगरेंस इन लोगो के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है :
⚠️ छोटे बच्चे।
⚠️ बुज़ुर्ग।
⚠️ गर्भवती महिलाएं।
⚠️ जिनको अस्थमा या सांस की एलर्जी है।
⚠️ सेंसिटिव स्किन वाले।
⚠️ स्किन सम्बन्धी समस्या से पीड़ित व्यक्ति।
⚠️ हार्मोनल असंतुलन से पीड़ित व्यक्ति।
⚠️ पालतू जानवर।
इन सबके लिए डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और फ्रेगरेंस ज्यादा हानिकारक है।
उपाय
डिशवाशिंग लिक्विड और सोप से होने वाली समस्याओं से बचने के लिए कुछ सावधानियां रखनी चाहिए।
डिशवाशिंग लिक्विड या सोप खरीदते समय क्या-क्या सावधानी रखे ?
✅ हमेशा लेबल को अच्छी तरह से पढ़कर ही ख़रीदे।
✅ ह्यूमन सेफ इंग्रीडिएंट्स ( human safe ingredients ) देखकर ही ख़रीदे।
✅ कुछ डिशवाशिंग लिक्विड और सोप में कम केमिकल्स होते है। कम केमिकल्स वाले ही लिक्विड और सोप ख़रीदे।
✅ कुछ कम्पनियां फ्रेगरेंस फ्री या कम फ्रेगरेंस वाले डिशवाशिंग लिक्विड और सोप बनाती है, जिनमे खुशबू बहुत कम होती है। इनको ही ख़रीदे।
✅ भरोसेमंद ब्रांड के हर्बल, आर्गेनिक या प्लांट बेस्ड लिक्विड या सोप ही ख़रीदे।
✅ बहुत ज्यादा झाग बनाने वाले लिक्विड और सोप ना ख़रीदे, बल्कि कम झाग बनाने वाले माइल्ड ( हल्का या सौम्य ) लिक्विड या सोप ही ख़रीदे।
बर्तनों को धोते समय क्या-क्या सावधानी रखे ?
✅ कम मात्रा में लिक्विड या सोप का इस्तेमाल करे।
✅ बर्तनो को 3 बार अच्छी तरह से रिन्स करे ( बर्तनों को बहते हुयें पानी में 3 बार धोएं )।
✅ बर्तन धोने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से साफ पानी से धोएं।
✅ बर्तन धोने के बाद अपने हाथों पर मॉइस्चराइजर लगाए या नारियल तेल लगाएं।
✅ जिन लोगों की स्किन बहुत सेंसिटिव है या स्किन की कोई भी समस्या है, वो लोग ग्लब्स पहनकर बर्तन धोये।
मार्केट में बर्तन धोने के लिए पहनने वाले ग्लब्स आसानी से मिल जाते है।
अपने हाथो की नेचुरल नमी और कोमलता को बचाने के लिए सभी लोग इन ग्लब्स को पहनकर बर्तन धो सकते है।
• स्पंज और स्क्रबर हमेशा साफ रखे। बर्तन धोने के बाद इनको अच्छी तरह से धोकर रखे।
• किचन में वेंटीलेशन रखे, ताकि शुद्ध हवा मिलती रही और दूषित हवा बाहर निकलती रहे।
• डिशवाशिंग लिक्विड और सोप को बच्चों, बुज़ुर्गो, बीमार व्यक्तियों और पालतू जानवर से दूर रखे।
• डिशवाशिंग लिक्विड की बोतल को और सोप के डिब्बे को अच्छी तरह से बंद करके रखे।
अब आप अच्छी तरह से समझ चुके होंगे कि बर्तनों को डिशवाशिंग लिक्विड या सोप में धोने से भी हमारी और हमारे परिवार के लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
इसलिए डिशवाशिंग लिक्विड या सोप खरीदते समय और बर्तनों को धोते समय ऊपर बताई गयी सावधानियां रखेगे तो इनका हमारे स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नही पड़ पायेगा।

