बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट जैसे सूक्ष्म जैविक संक्रमण और प्रदूषण, रसायन जैसे पर्यावरणीय कारणों से जब शरीर में लम्बे समय तक लगातार सूजन रहती है, तो इसे ‘पुरानी सूजन’ या मेडिकल भाषा में ‘क्रोनिक इन्फ्लेमेशन’ बोलते हैं।
लम्बे समय तक इस सूजन के बने रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली अति सक्रिय ( ज़रूरत से ज्यादा एक्टिव ) होकर अपने ही अंगों पर हमला करती है जिसका दिमाग़, दिल, लीवर, जोड़, माँसपेशियों और आँतो पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
क्या कहते है आँकड़े और सर्वे –

इस बीमारी की गंभीरता को समझने के लिए दुनिया और देश के कुछ प्रमुख स्वास्थ्य आँकड़ों पर नज़र डालना ज़रूरी है:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): साल 2030 तक पुरानी सूजन से जुडी समस्याएंँ दुनियाभर के लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगो को प्रभावित कर सकती हैं।
- इंडियन डेटा इनसाइट्स (2025): इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 16 करोड़ लोग पुरानी सूजन से जुडी बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें ह्रदय रोग, फैटी लीवर, मानसिक समस्याएंँ, आँतो की समस्याएंँ, मोटापा और डायबिटीज प्रमुख हैं।
- AIIMS और ICMR रिपोर्ट (2025): 40 साल से ऊपर के लोगो में आँतो सम्बन्धी और पुरानी सूजन सम्बंधित समस्याओं में 35 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
पुरानी सूजन ( क्रोनिक इन्फ्लेमेशन ) के लक्षण –
अक्सर यह सूजन बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन हमारा शरीर कई तरह के संकेत देता है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- बिना कोई भारी काम किये हुए अकारण थकान महसूस होना।
- शरीर में ऊर्जा (एनर्जी) की लगातार कमी रहना।
- जोड़ो और माँसपेशियों में दर्द और अकड़न।
- बार – बार पेट ख़राब होना, जैसे गैस, कब्ज या दस्त की समस्या।
- दिमागी थकावट (Brain Fog) महसूस होना और नींद ना आना।
- शरीर में अक्सर हल्का दर्द और कभी – कभी जलन महसूस होना।
- तनाव, गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ जाना।
- बार – बार वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन होना।
- मुहाँसे, एलर्जी, झाईयां और एक्जिमा जैसी त्वचा की समस्याएँ।
पुरानी सूजन ( क्रोनिक इन्फ्लेमेशन ) के मुख्य कारण –
- खराब डाइट : नमक, चीनी और मैदे का अत्यधिक सेवन।
- प्रोसेस्ड फूड : तला हुआ, डिब्बाबंद और पैकेटबंद चीजों का लगातार सेवन।
- बुरी आदतें : धूम्रपान (Smoking) और शराब का अधिक सेवन।
- आँतो की खराब सेहत (Poor Gut Health)।
- पहले से ही अगर थायराइड और गठिया जैसी आटोइम्यून समस्याएं है।
“सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ने का एक बड़ा असर हमारे जोड़ों पर पड़ता है। अगर आप भी अक्सर दर्द महसूस करते हैं, तो इसे भी पढ़े : [ सर्दियों (जाड़े) में जोड़ो का दर्द | कारण और उपाय]”
बचाव के उपाय –
- लाइफस्टाइल में सुधार : अपनी दिनचर्या ठीक करें समय पर उठें, समय पर खाएं और समय से सोएं ।
- त्रिफला, हल्दी, हरी और पत्तेदार सब्जियाँ, ग्रीन टी, मछली, अंडे, अदरक, अखरोट, सेब, केला, दलिया, दही, लस्सी, छाछ, सलाद, लहसुन और प्याज़ का सेवन करे, इनसे आँतो की सेहत अच्छी रहती है और इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है, जो सूजन घटाने मे बहुत लाभदायक है, 8 से 10 गिलास पानी रोज पीये।
- नमक, चीनी, मैदा का सेवन कम से कम करे। डिब्बाबंद, पैकेटबंद प्रोसेस्ड चीजों का सेवन ना करे या कम से कम करे।
- मानसिक तनाव को कम करे, चिन्ता से दूर रहे, ध्यान (मेडिटेशन) करे, समय – समय पर अपना मनपसंद संगीत, गाने आदि सुने।
- किसी भी तरह का व्यायाम करे, योग करे, अगर कुछ ना कर सके तो कम से कम रोज आधे घण्टे तक पैदल चले।
“सूजन कम करने के लिए अपने खान – पान में बदलाव करना सबसे प्रभावी तरीका है। डाइट में क्या शामिल करें और क्या नहीं, इसे गहराई से समझने के लिए आप एंटी – इन्फ्लेमेटरी डाइट (Healthline) देख सकते हैं।”
1. आयुर्वेदिक चिकित्सा
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी और CCRAS की संयुक्त स्टडी के अनुसार, आयुर्वेदिक पद्धति अपनाने वाले 78 प्रतिशत पुरानी सूजन के मरीज़ों में 3 महीने मे ही सुधार होते देखा गया है।
- आयुर्वेदिक पद्धति में पंचकर्म, रसायन चिकित्सा और पोषक आहार पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
शरीर से ज़हरीले तत्वों को बाहर किया जाता है और पाचन अग्नि की गड़बड़ी को दूर किया जाता है।
त्रिफला और हल्दी का नियमित सेवन कराया जाता है।
एलोपैथी इलाज़ –
अगर सूजन ज्यादा है तो एलोपैथी एक अच्छा विकल्प है। इसमें मरीज़ की सूजन और उससे हुई समस्याओं के अनुसार सी. – रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट , आई. एल.- 6 और हाई सेंसेटिव सी – रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट कराये जाते है ।
जिनकी रिपोर्ट के अनुसार व्यक्ति का दवाओं द्वारा इलाज़ होता है।
पुरानी सूजन का होम्योपैथी, नेचुरोपैथी और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध सिद्ध चिकित्सा पद्धति मे भी बहुत अच्छा इलाज़ है।
अक्सर लोग अपने शरीर मे छिपी पुरानी सूजन को पहचान नही पाते है । ज्यादातर लोगो को पता भी नही है कि पुरानी सूजन (क्रोनिक इन्फ्लेमेशन) होता क्या है।
पुरानी सूजन एक साइलेंट किलर है जो धीरे – धीरे शरीर को अंदर से खोखला करती है। अच्छी बात ये है कि यह हमारे भोजन और लाइफस्टाइल से सीधे जुड़ी है। अगर हम तला – भुना, नमक, चीनी, मैदा और डिब्बाबंद – प्रोसेस्ड फूड को कम खाये , संतुलित भोजन खाएं, व्यायाम करें, योग करें, रोज टहलें और तनाव कम करें, तो इस सूजन को काफी हद तक काबू किया जा सकता है। इलाज से बेहतर है बचाव, और बचाव की शुरुआत आज, अभी, आपके भोजन के अगले निवाले से है।

